Class 11 Information Technology मॉड्यूल 8: डिजाइन दोषों का समाधान
प्रश्न 1. डिजाइन दोषों को हल करने का पहला चरण क्या है?
उत्तर: दोष की पहचान और रिपोर्टिंग। इसमें दोष कहाँ और कब हुआ, इसकी जानकारी दर्ज की जाती है।
प्रश्न 2. गंभीरता के आधार पर दोषों को प्राथमिकता देना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: इससे गंभीर दोषों को पहले ठीक किया जा सकता है। जैसे सिस्टम क्रैश और सुरक्षा संबंधी दोष।
प्रश्न 3. दोष समाधान में Root Cause Analysis का क्या महत्व है?
उत्तर: यह दोष के वास्तविक कारण की पहचान करता है। इससे वही समस्या भविष्य में दोबारा होने से रोकी जा सकती है।
प्रश्न 4. Cross-functional Teams दोष समाधान में कैसे योगदान देती हैं?
उत्तर: डेवलपर, परीक्षक, डिजाइनर और प्रोडक्ट मैनेजर मिलकर समस्या का विश्लेषण करते हैं और बेहतर समाधान निकालते हैं।
प्रश्न 5. डिजाइन संबंधी दोषों को हल करने के मुख्य कार्य क्या हैं?
उत्तर:
डिजाइन की समीक्षा।
डिजाइन में आवश्यक बदलाव।
प्रभाव का विश्लेषण।
दस्तावेजों को अपडेट करना।
प्रश्न 6. डेवलपर्स कोड संबंधी दोषों को कैसे ठीक करते हैं?
उत्तर:
दोष वाले कोड की पहचान।
कोड और लॉजिक में सुधार।
यूनिट टेस्टिंग।
कोड समीक्षा।
प्रश्न 7. दोष समाधान में Regression Testing क्यों आवश्यक है?
उत्तर: यह सुनिश्चित करता है कि किसी दोष को ठीक करने के बाद सॉफ्टवेयर के पहले से सही काम कर रहे हिस्सों में कोई नया दोष उत्पन्न न हो।
प्रश्न 8. दोष समाधान के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज अपडेट किए जा सकते हैं?
उत्तर:
आवश्यकता दस्तावेज।
डिजाइन दस्तावेज।
टेस्ट प्लान और टेस्ट केस।
उपयोगकर्ता दस्तावेज।
प्रश्न 9. दोष समाधान के सत्यापन में Feedback क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इससे उपयोगकर्ता या परीक्षक पुष्टि कर सकते हैं कि दोष वास्तव में ठीक हुआ है और कार्यक्षमता वापस आ गई है।
प्रश्न 10. डिजाइन दोषों के प्रबंधन में Continuous Improvement की क्या भूमिका है?
उत्तर: यह पुरानी गलतियों से सीखकर विकास प्रक्रिया और डिजाइन मानकों में लगातार सुधार करता है, जिससे भविष्य में दोष कम होते हैं।
