अध्याय 1: नेताजी का चश्मा
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न और उत्तर
सोचिए और बताइए (पृष्ठ संख्या 67)
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हालदार साहब को क्यों लगा कि कैप्टन चश्मेवाला देशभक्त है?
हालदार साहब को लगा कि कैप्टन चश्मेवाला देशभक्त है क्योंकि वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बिना चश्मे वाली मूर्ति को देखकर दुखी होता था और उसे यह कमी खलती थी। वह अपनी छोटी-सी दुकान से कोई-न-कोई चश्मा नेताजी की मूर्ति पर लगा देता था, ताकि नेताजी की मूर्ति अधूरी न लगे। यह उसका देश के नायक के प्रति अगाध प्रेम और सम्मान दर्शाता है, जो सच्ची देशभक्ति का परिचायक है।
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पानवाला कैप्टन को 'पागल' क्यों कहता था?
पानवाला कैप्टन को 'पागल' इसलिए कहता था क्योंकि उसकी नज़र में कैप्टन का चश्मा बदलने का कार्य एक अनावश्यक और सनकीपन था। वह कैप्टन की देशभक्ति और मूर्ति के प्रति उसके आदर भाव को समझ नहीं पाता था, बल्कि इसे एक बचकाना और अव्यावहारिक काम मानता था। पानवाला की यह टिप्पणी उसकी अपनी संवेदनहीनता और देशभक्ति के प्रति उदासीनता को दर्शाती है।
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हालदार साहब ने अंत में क्या देखा? इससे उन्हें क्या एहसास हुआ?
हालदार साहब ने अंत में देखा कि नेताजी की मूर्ति पर एक **सरकंडे का बना हुआ छोटा-सा चश्मा** लगा हुआ था, जैसा बच्चे खेल-खेल में बना लेते हैं। इसे देखकर हालदार साहब भावुक हो गए और उनकी आँखें भर आईं। उन्हें यह एहसास हुआ कि भले ही कैप्टन चश्मेवाला अब नहीं रहा, लेकिन देशप्रेम की भावना अभी भी लोगों (विशेषकर बच्चों) के दिलों में जीवित है। यह एक उम्मीद की किरण थी कि देशभक्ति कभी खत्म नहीं होगी और छोटे-छोटे प्रयास भी राष्ट्रप्रेम को बनाए रख सकते हैं।
प्रश्न अभ्यास (पृष्ठ संख्या 68-69)
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सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन इसलिए कहते थे क्योंकि उसके भीतर देशप्रेम और देशभक्ति की प्रबल भावना थी। वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे सेनानी के प्रति अगाध श्रद्धा रखता था और उनकी अधूरी मूर्ति को चश्मा पहनाकर पूरा करता था। उसका यह कार्य किसी फौजी के कर्तव्यपालन से कम नहीं था। उसकी इस निस्वार्थ भावना और त्याग के कारण ही लोग उसे 'कैप्टन' जैसे सम्मानजनक नाम से पुकारते थे।
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हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था, लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा। क्यों?
हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था क्योंकि उन्हें लगा था कि कैप्टन के न रहने से अब नेताजी की मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं होगा, और बिना चश्मे की मूर्ति देखना उन्हें दुख देगा। लेकिन जब आदतवश उनकी नज़र मूर्ति पर पड़ी और उन्होंने सरकंडे का चश्मा देखा, तो उनकी भावनाएँ उमड़ पड़ीं। उन्हें लगा कि भले ही कैप्टन नहीं रहा, पर देशप्रेम की भावना अभी भी बच्चों के मन में जीवित है। इस उम्मीद और भावुकता के कारण ही उन्होंने तुरंत ड्राइवर को गाड़ी रोकने को कहा।
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कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा क्यों लगा देता था?
कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा इसलिए लगा देता था क्योंकि वह नेताजी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति को बिना चश्मे के नहीं देख पाता था। उसे यह कमी खलती थी और वह नेताजी के प्रति अपने सम्मान और देशप्रेम को व्यक्त करना चाहता था। वह नेताजी की मूर्ति को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता था। जब कोई ग्राहक नेताजी की मूर्ति पर लगा चश्मा माँगता, तो वह उसे दे देता और उसकी जगह दूसरा चश्मा लगा देता था, ताकि नेताजी कभी भी चश्मा-रहित न रहें।
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(क) 'पानवाला' का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
पानवाला चौराहे पर स्थित अपनी पान की दुकान पर बैठा एक मोटा, काला और खुशमिजाज व्यक्ति था। उसकी तोंद निकली हुई थी और वह हमेशा मुँह में पान भरे रहता था, जिससे उसके दाँत लाल-काले हो गए थे। वह हँसमुख स्वभाव का था और अक्सर किसी भी बात पर ठहाके लगाकर हँसता था, जिससे उसकी तोंद थिरकने लगती थी। वह बातूनी था और लोगों से बातें करने में माहिर था। हालाँकि वह कैप्टन चश्मेवाले की देशभक्ति का उपहास करता था और उसे 'पागल' कहता था, पर कैप्टन की मृत्यु पर वह भी उदास हो जाता है और उसकी आँखें नम हो जाती हैं, जिससे उसकी मानवीय संवेदनशीलता भी प्रकट होती है।
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(ख) 'वह लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल!' कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
पानवाले की यह टिप्पणी कैप्टन के प्रति उसकी अज्ञानता, संवेदनहीनता और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है। यह टिप्पणी निंदनीय है क्योंकि यह न केवल कैप्टन जैसे देशभक्त का अपमान है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पानवाला देशभक्ति को केवल शारीरिक बल और सेना में होने से जोड़ता है, जबकि सच्ची देशभक्ति तो मन की भावना होती है। कैप्टन भले ही शारीरिक रूप से अक्षम था, पर उसके भीतर देश और देश के नायकों के प्रति जो सम्मान और प्रेम था, वह किसी भी फौजी से कम नहीं था। पानवाला की टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दूसरों के अच्छे कार्यों और भावनाओं का उपहास करते हैं क्योंकि वे उसे समझ नहीं पाते या स्वयं उन भावनाओं से वंचित होते हैं।
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निम्नलिखित वाक्य में तर्क सहित बताइए कि किस वाक्य में देशप्रेम की भावना नहीं झलकती है:
यह प्रश्न अक्सर पाठ्यपुस्तक में दिए गए वाक्यों पर आधारित होता है। चूंकि यहाँ कोई विशेष वाक्य नहीं दिया गया है, मैं एक सामान्य उदाहरण दे सकता हूँ।
**उदाहरण:** "जो व्यक्ति अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए देश के संसाधनों का दुरुपयोग करता है।" - इस वाक्य में देशप्रेम की भावना नहीं झलकती है, क्योंकि स्वार्थ के लिए देश को नुकसान पहुँचाना देशप्रेम के बिल्कुल विपरीत है।
सामान्यतः, देशप्रेम की भावना उन वाक्यों में नहीं झलकती जहाँ:- देश या उसके प्रतीकों का अनादर हो रहा हो।
- व्यक्तिगत स्वार्थ को देशहित से ऊपर रखा जा रहा हो।
- भेदभाव या अलगाव को बढ़ावा दिया जा रहा हो।
- देश के विकास या सुरक्षा में बाधा डाली जा रही हो।
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