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अध्याय 3: साना-साना हाथ जोड़ि

लेखिका: मधु कांकरिया

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न और उत्तर

I. मौखिक समझ की जाँच (पृष्ठ XX - काल्पनिक)

  1. गंगटोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?

    गंगटोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ के लोग बेहद मेहनती हैं। वे पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर दिन-रात मेहनत करके सड़कें बनाते हैं, पहाड़ों को काटते हैं, और अपनी जीविका कमाते हैं। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, उन्होंने अपने शहर को सुंदर और समृद्ध बनाया है। उनका यह कठोर परिश्रम और जीवन जीने की दृढ़ता उन्हें 'बादशाहों' जैसा दर्जा देती है, क्योंकि वे अपनी मेहनत से अपने जीवन और शहर पर राज करते हैं।

  2. 'साना-साना हाथ जोड़ि' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि यह प्रार्थना लेखिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण थी।

    नेपाली भाषा में 'साना-साना हाथ जोड़ि, गरब छू नेपाली' का अर्थ है **"छोटे-छोटे हाथ जोड़कर मैं प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो।"** यह प्रार्थना लेखिका के लिए इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह उनके मन को शांति और सकारात्मकता से भर देती है। इस प्रार्थना ने उन्हें जीवन की सच्चाई, प्रकृति और मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था का अनुभव कराया। यह प्रार्थना उन्हें बताती है कि जीवन में कठिन संघर्षों के बावजूद, हमें हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए और अपने कर्मों को अच्छाई के लिए समर्पित करना चाहिए। यह प्रार्थना उन्हें एक आध्यात्मिक जुड़ाव का एहसास कराती है।

II. सोचें और लिखें (पृष्ठ XX - काल्पनिक)

  1. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या-क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं?

    जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, भौगोलिक स्थिति और जनजीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं:

    • **प्राकृतिक सौंदर्य:** उसने बताया कि कैसे गंगटोक से हिमालय की सुंदर वादियाँ और बर्फ से ढकी चोटियाँ दिखती हैं।
    • **बौद्ध पताकाएँ:** उसने रंगीन और सफेद पताकाओं का अर्थ बताया - सफेद पताकाएँ शांति और अहिंसा की प्रतीक होती हैं और किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर लगाई जाती हैं, जबकि रंगीन पताकाएँ किसी शुभ कार्य की शुरुआत में लगाई जाती हैं।
    • **प्रेयर व्हील (धर्मचक्र):** उसने बताया कि प्रेयर व्हील को घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं, जो बौद्ध धर्म में एक मान्यता है।
    • **पहाड़ी जीवन की कठिनाइयाँ:** उसने बताया कि कैसे पहाड़ों पर जीवन बहुत कठिन है और पहाड़ी औरतें और बच्चे भी सड़कों के निर्माण जैसे कठोर श्रम में लगे रहते हैं।
    • **सेना का महत्व:** उसने सेना के जवानों की विषम परिस्थितियों में भी देश की रक्षा करने की भूमिका पर प्रकाश डाला।
    • **जल-प्रपात (झरने):** उसने सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल जैसे सुंदर झरनों के बारे में बताया।
    ये जानकारियाँ लेखिका को केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि वहाँ के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जीवन को समझने में भी मदद करती हैं।

  2. "कटाओ" को भारत का स्विट्जरलैंड क्यों कहा गया है? इस कथन के पक्ष में अपने विचार प्रकट कीजिए।

    कटाओ को भारत का स्विट्जरलैंड इसलिए कहा गया है क्योंकि इसकी प्राकृतिक सुंदरता स्विट्जरलैंड की सुंदरता से मेल खाती है। कटाओ में चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ, शांत और स्वच्छ वातावरण, हरे-भरे घास के मैदान और कलकल करते झरने हैं, जो मन को मोह लेते हैं। यह स्थान प्रदूषण से मुक्त है और यहाँ की प्राकृतिक छटा अनुपम है। जिस प्रकार स्विट्जरलैंड अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, उसी प्रकार कटाओ भी अपनी अछूती और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह उपाधि पाने का हकदार है। हालाँकि, लेखिका स्वयं मानती हैं कि कटाओ इतना सुंदर होने के बावजूद अभी तक पर्यटकों के बीच स्विट्जरलैंड जितना प्रसिद्ध नहीं है, क्योंकि यह अधिक विकसित नहीं है।

  3. यात्रा वृत्तांत के आधार पर बताइए कि लेखिका को प्रकृति के किस रूप ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया और क्यों?

    यात्रा वृत्तांत के आधार पर लेखिका को प्रकृति के **अत्यंत विराट, शांत, और मंत्रमुग्ध कर देने वाले सौंदर्य** ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। विशेष रूप से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियाँ, कलकल करते झरने (जैसे सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल), और बादलों से ढकी पहाड़ियाँ। लेखिका को प्रकृति के इस रूप में **असीम शांति और आध्यात्मिकता** का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि प्रकृति अपनी विशालता में मनुष्य के सारे दुखों और चिंताओं को समेट लेती है। प्रकृति की यह अलौकिक सुंदरता उन्हें जीवन की समस्याओं से परे एक शांतिपूर्ण संसार में ले जाती है, जहाँ वे स्वयं को ईश्वर के करीब महसूस करती हैं।

  4. प्रकृति में निहित मानवीय संघर्ष और जीवन के यथार्थ को लेखिका ने कैसे देखा है?

    लेखिका ने प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य के भीतर **मानवीय संघर्ष और जीवन के यथार्थ** को भी गहराई से देखा है। उन्होंने देखा कि जहाँ एक ओर प्रकृति अपनी छटा बिखेर रही है, वहीं दूसरी ओर जीवनयापन के लिए लोग कितना संघर्ष कर रहे हैं।

    • उन्होंने **पहाड़ी स्त्रियों को कठोर श्रम** करते देखा, जो पत्थरों को तोड़कर सड़कें बना रही थीं, उनकी पीठ पर बच्चों को बँधा हुआ था। यह दृश्य उन्हें विचलित कर गया कि सुंदरता के बीच भी जीवन कितना कठोर है।
    • उन्होंने **सेना के जवानों को विषम परिस्थितियों** में, कड़ाके की ठंड और ऊँचाई पर देश की रक्षा करते देखा। इससे उन्हें एहसास हुआ कि देश की सुरक्षा कितनी बड़ी कीमत पर होती है।
    • उन्होंने देखा कि जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य मन को शांति देता है, वहीं जीवन की वास्तविकता **कठोर परिश्रम, त्याग और बलिदान** की माँग करती है।
    इस प्रकार, लेखिका ने प्रकृति के सौंदर्य और मानवीय संघर्ष के बीच एक संतुलन स्थापित करते हुए जीवन के यथार्थवादी पहलू को दर्शाया है।



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