NCERT Solutions Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 – हार की जीत
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कोन-सा है? उसके सामने तारा (☆) बनाइए
(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
- बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
- बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
- बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
- बाबा भारती असावधान हो गए।
उत्तर – •बाबा भारती असावधान हो गए।
(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
- बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
- बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
- बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
- बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।
उत्तर – •बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
बाबा भारती को दर था की सुलतान को खड्गसिंह लेकर चला जाएगा। इस वजह से वे कई मास सो ना सके। लेकिन कई मास के बाद भी वह नहीं आया तो बाबा भारती असावधान हो गए। बाबा को सुलतान से बहुत लगाव था। वे उसका अपने बेटे की तरह खयाल रखते थे। रोज उसके साथ सैर पर जाते थे। उन्हें लगता था की में इसके सिवा नहीं रह पाऊंगा।
शीर्षक
(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
सुलतान की इच्छा थी की उसे बाबाजी के पास जो घोड़ा है वह मिले। यह इच्छा उसने बाबाजी को बोलकर भी दिखाई। इस वजह से बाबाजी कई महीनों तक सो नहीं पाए। लेकिन एक दिन डाकू खड्गसिंह बाबाजी को फसाकर घोड़ा लेकर जा रहा था। लेकिन तभी बाबाजी ने उसे कहा के आज के बाद कोई बेसहारे गरीब पर भरोसा नहीं करेगा। इसी वक्त बाबाजी की जीत हो गई थी। उनके पास से उनका घोड़ा जा रहा था इसमें उनकी हार थी लेकिन इस हैं में भी जीत शामिल थी। इसके बाद उस डाकू ने बाबाजी को घोड़ा लौटा दिया। इसीलिए इस कहानी को हार की जीत यह शीर्षक दिया गया है।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
विश्वास
इस कहानी को हम यह नाम देना चाहेंगे। क्यों की जैसा बाबाजी ने कहा कि आज के बाद कोई बेसहारा गरीब की मदद नहीं करेगा। सभी उन्हे अविश्वास की नजर से देखेंगे। अगर डाकू वह घोड़ा लाकर बाबाजी को नहीं देते तो सचमुच ही सभी लोग गरीबों को अविश्वास की नजर से देखते।
(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
यह घटना के बारे में तुम किसी से कुछ भी नही कहोगे यह वचन बाबाजी ने डाकू खड्गसिंह से ले लिया।
पंक्तियों पर चर्चा
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए-
“भगवत-भजन से जोर समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
बाबा हर समय पूजा पाठ में लगे रहते थे। लेकिन इसी के साथ साथ उन्हें उनका घोड़ा भी अधिक प्रिय था। वे अपना पूजा पाठ करके कई समय अपने घोड़े के लिए भी निकाल लेते थे। वह पूरा समय वे अपनेघोड़ को अर्पण कर देते।
“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”
बाबाजी का वह घोड़ा उन्हें प्रिय था। यह घोड़ा उनके पास रहता था। उसकी चाल भी अलग थी। उनके पास ऐसा घोड़ा है जो सब से अलग है इस बात का उन्हें घमंड था और इसी बात का आश्चर्य खड्गसिंह को था। घोड़े को देख खड्गसिंह को आश्चर्य हुआ।
“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
डाकू सिर्फ अपनी मनपसंद वस्तु लोगों से छीन ना जानते हैं। जिसकी वस्तु होती है उन्हे उस वस्तु के प्रति कितना लगाव होता है इस बात से उन्हें कोई फरक नही पड़ता। जो भी उन्हें पसंद आता है वह वस्तु उनके पास होनी चहिए। ऐसी उनकी मनशा होती है।
“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और का, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
जब खड्गसिंह बाबाजी के घोड़े को लेकर जा रहा था। तब बाबाजी ने उसे रुकने कहा। उसे लगा कि यह घोड़ा बाबाजी वापस मांग लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाबाजी ने उसे ऐसे देखा जैसे उस घोड़े पर उसका अधिकार था।
“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
बाबा भारती के पांव आधी रात को अस्तबल की तरफ मुड़े लेकिन जब वह फाटक पर पहुंचे तब उन्हे यह एहसास हो गया की अब सुलतान वहा पर नहीं है। इस वजह से उन्हें अपनी भूल प्रतीत हों गई।
सोच विचार के लिए
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”
(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
बाबा भारती और डाकू खड्गसिंह के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”
(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
डाकू खड्गसिंह के आंसू पश्चाताप के थे और बाबा भारती के आंसू खुशी के थे।
दिनचर्या
(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
बाबा भारती सुबह उठकर स्नान करते थे। उसके बाद वे अपने सुलतान को भी पुत्र की तरह नहलाते थे। बादमे वह भगवान की भक्ति में लीन होते थे। दोपहर को भोजन करते और सुलतान को भी भजन करवाते। थोड़ा सा आराम करके शाम को सुलतान के साथ घूमने निकल जाते थे।
(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
हम सुबह जल्दी उठकर अपना कार्य करते है। सुबह पहले स्नान करके,नाश्ता करके पानी पढ़ाई करने लगते है। इसके बाद मां की कामों में मदद करते है और अपनी पाठशाला चले जाते है। शाम को आकर खेलने जाते है। आकार फिर पढ़ाई करके मां के कामों में हाथ बटा देते हैं।
कहानी की रचना
(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए
बाबा भारती ने जो डाकू को अपनी बात समझाई के ये बात तुम किसी से ना कहना अगर तुम ऐसा करोगे तो लोगो का गरीब और बेसहारा लोगों पर से विश्वास उठ जाएगा। यह बात हमे पसंद आई।
(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे- शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए हैं, जैसे- सवादों के विषय में अपने विचार लिखें।
यह कहानी हमे बहुत पसंद आई। बाबाजी ने गुस्सा ना करते हुए अपना घोड़ा उस डाकू को दे दिया। उस समय बाबाजी का मन दुखी था। लेकिन फिर भी बाबाजी ने गुस्सा नही किया और अपनी बात शांति से कह दी। उस वक्त के जो संवाद है उनको बड़ी भौकता के साथ लिखा गया है। उनसे बाबाजी के मन में जो भाव है वह दिखाई देते है।
मुहावरे कहानी से
(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, लड्डू होना, हृदय पर साँप लोटना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
(ख) अब इनका प्रयोगः करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
फूले न समाना-
मां अपने बेटे को स्वस्थ देख फुले न समाई।
मुँह मोड़ लेना –
राघव ने अपने मित्र से मुँह मोड़ लिया।
मुख खिल जाना –
बगीचे में खिले रंग बिरंगे फूल देख दादी का मुख खिल गया।
लट्टू होना –
दादा जी किताबों पर लट्टू थे।
हृदय पर साँप लोटना –
अपने मित्रों की सराहना देख राहुल के हृदय पर साँप लोट गया।
न्योछावर कर देना –
सैनिक देश पर अपनी जान न्योछावर कर देते हैं।
कैसे-कैसे पात्र
इस कहानी में तीन मख्य पात्र हैं बाबा भारती डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द चित्रों को पूरा कीजिए।
बाबा भारती –
सद् विचारी, मददगार, करुणामय, दयालु
डाकू खड्गसिंह –
डरावना, बेरहम, ताकतवर
सुलतान घोड़ा –
सुंदर, बलवान
पाठ से आगे
सुलतान की कहानी
मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए।
(संकेत- आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैं मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूं……)
मैं एक घोड़ा हूं। मेरा नाम सुलतान है। मैं जिनके साथ रहता हूं वे एक बाबाजी है। वे बड़े अच्छे आदमी है। मेरा बहुत खयाल रखते हैं। मुझे शाम को घुमाने भी ले जाते है।
एक दिन एक डाकू आया और मुझे देखा। बाबाजी से कहा की मैं सुलतान को लेकर जाऊंगा। इस वजह से बाबाजी डर गए। वे रात में सोते भी नहीं थे। एक दिन हम घूमने जा रहे थे। तब एक अपाहिज आदमी आया और कहा की मेरी मदद करो। बाबाजी ने उसे मुझपर बिठाया। एक वक्त ऐसा आया की उसने मुझे बाबाजी के हाथ से छीन लिया और मुझे लेकर गया।
उस वक्त बाबाजी घबरा गए। लेकिन इस समय भी उन्होंने डाकू से शांति से बात की। उन्होंने कहा की तुम जो कर रहे हो उसे किसी को भी मत बताना तुमने ऐसा किया तो सब लोगों का गरीब बेसहारे लोगों पर से भरोसा उठ जाएगा। कोई भी ऐसे लोगों पर भरोसा विश्वास नहीं करेगा।
इस बात पर डाकू बहुत विचार करने लगा। आधी रात में वह मुझे बाबाजी के पास लेकर गया और उसने मुझे अस्तबल में बांध दिया।
मन के भाव
क) कहानी में से चुनकर कुछ छ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था –
(संकेत जैसे गली में किसी कुत्ते को देखकर डर या प्रसन्नता या करुणा आदि का अनुभव करना)
- चकित – डाकू खड्गसिंह को देख चकित रह गया।
- अधीर – जब बाबा भारती अपने घोड़े की प्रशंसा सुनना चाहते थे।
- प्रसन्नता – जब बाबा भारती सुलतान के पीठ पर बैठ घूमने जा रहे थे।
- करुणा – डाकू खड्गसिंह जब अपाहिज होने का नाटक कर रहा था तब उसके आवाज में करुणा थी।
- डर – जब बाबा के हाथ से घोड़े की लगाम छूट गई तब वे डर गए।
- निराशा – जब उनके पांव सुलतान की अस्तबल की ओर मुड़े तब उनके समझ में आया की वहा पर सुलतान नही है। इस वजह से वे निराश हो गए।
(ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।
चकित – जब कोई ऐसी घटना हो जो आश्चर्य से भरी हो।
अधीर – जब मां कोई स्वादिष्ट व्यंजन बनाती हो।
प्रसन्नता – जब परीक्षा में अच्छे अंक मिले।
करुणा – कोई बेसहारा, अपाहिज व्यक्ति दिखे।
डर – जब ऊंचाई पर चढ़ते हैं।
निराशा – जब मनचाहा परिणाम ना आए।
